बहुत देर में जब आंख लगी,
एक परी सपने में मिली,
बोली- मांग लो जो चाहिए,
जमीन के सारे फूल याआसमान के तारे,
सोचा क्या मांगू,
जमीन पर फूल बहुत कम हैंऔर आसमान में तारे,
मैंने कहा परी रानी गर देना ही हैतो कुछ ऐसा कर दो,
कम से कम जमीन केनन्हे सितारों में हास्य रस भर दो।
नन्हे मुरझाते चेहरों कोमुस्कान से रोशन कर दो,
मैंने बहुन दिनों सेनिश्चल हंसी नहीं सुनी,
खनखनाती घंटियों की चहक नहीं सुनी,
आए दिन की चिल्ल पौं में,
बचपन या तो रो रहा हैया फिर चुपचापटीवी के नक्शे कदम परचल रहा है,
ना नानी की कहानियां हैंना दादी के गीत,
बस एक मात्र टीवी ही है उनका मनमीत।
Friday, July 25, 2008
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